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एक दिन पति का (व्यंग्य)- गृहलक्ष्मी की कहानियां

गृहलक्ष्मी की कहानियां: आज सुबह—सुबह जैसे ही सूरज की सुनहरी किरणों ने धरा पर अपने डेरे का विस्तार किया, विनय जी की आंखें खुली। हर रोज की तरह आज उन्हें अपनी धर्मपत्नी नम्रता से चाय के लिए किसी भी प्रकार की कोई विनती या आग्रह करने की आवश्यकता नहीं पड़ी। उनकी धर्मपत्नी फौरन बड़ी विनम्रता […]