मधु गोयल
बुधवार का दिन भगवान गणेश को समर्पित होता है। किसी भी शुभ या मांगलिक कार्य के शुरू करने के पहले भगवान गणेश की पूजा की जाती है।
गणपति को विघ्नहर्ता के नाम से भी जाना जाता है। इनकी दो पत्नियां - रिद्धि-सिद्धि हैं, जिनसे उन्हें दो पुत्र शुभ-लाभ की प्राप्ति हुई।
लेकिन क्या आप जानते हैं गणेश जी की एक पुत्री भी है, जिनका नाम संतोषी है। आइये जानें इनकी उत्त्पति से जुड़ी पौराणिक कथा क्या है?
कथा के अनुसार, एक बार गणेश जी रक्षा बंधन के दिन अपने बहन से रक्षा सूत्र बंधवा रहे थे तभी गणेश जी के पुत्रों ने उनसे पूछा ये क्या है।
गणेश जी ने बताया कि यह रक्षासूत्र है जो बहन अपने भाई की कलाई पर बांधती है। यह सुनकर उनके पुत्रों ने भी एक बहन की इच्छा प्रकट की।
तब भगवान गणेश ने अपनी शक्तियों से एक ज्योति उत्पन्न की और उसे, दोनों पत्नियों की आत्मशक्ति के साथ सम्मिलित कर लिया। बाद में इसी ज्योति ने कन्या का रूप ले लिया।
इसी कन्या को संतोषी माता के नाम से जाना जाता है। चूंकि इनका जन्म शुक्रवार को हुआ था इसलिए संतोषी माता का व्रत शुक्रवार को रखा जाता है।
जो भक्त शुक्रवार के दिन संतोषी माता का विधि-विधान से पूजन करते हैं उसके घर में सुख-शांति व समृद्धि आती है और उनकी सभी चिंताएं दूर हो जाती हैं।
मधु गोयल