प्रतिमा सिंह
जो भी व्यक्ति इस मंदिर में भगवान श्री कृष्ण के दर्शन कर लेता वह अपने सभी पापों से मुक्त हो जाता। इसलिए सभी श्रद्धालु अपने पाप धो लेते थे।
एक दिन यमराज श्री कृष्ण से बोले की धरती पर बैकुंठ धाम होने से सभी आपके दर्शन कर अपने पाप धो लेते हैं तो कोई भी यमलोक नहीं जा रहा था।
श्री कृष्ण ने कहा कि 22 सीढ़ियों में से तीसरी सीढ़ी पर जो दर्शन के बाद अपना पैर रखेगा उसके पाप क्षीण हो जाएंगे और वह यमलोक चल जाएगा।
इसलिए मंदिर के 22 सिढ़ियों में से तीसरी सिढ़ी को काले रंग से रंग गया है और श्रद्धालुओं को इस सीढ़ी पर पैर रखने से मना किया जाता है।
जगन्नाथ पुरी मंदिर में जहां चार द्वार हैं वहीं 22 सिढि़यों का भी अपना रहस्य है। इन 22 सीढ़ियों को इंसान की 22 कमजोरी के रूप में दर्शाया गया है।
इन सीढ़ियों के बारे में लिखा गया है कि अगर इनको देखें तो यह 18 सीढ़ियां ही दिखेंगी। बाजार की तरफ की दो सीढ़ियों को जोड़ें तो यह 20 हैं।
इसके साथ ही 21 और 22वीं सीढ़ी मंदिर के रसोई की ओर हैं। इन सीढ़ियों की चौड़ाई 6 फीट बताई जाती है और 70 फीट इसकी लंबाई है।
प्रतिमा सिंह